Thursday, 13 December 2012

सोचिए ज़रा


हमारी सबसे बड़ी समस्या आज के दिन है की हम आभिजात्य की ओर भाग रहे हैं .हमे समझना होगा की जो लौकिक नही वह सभ्य तो हो सकता है सुसंस्कृत नही होसकता ..समझने केलिए कह सकते हैं की जो अंतर प्यार और कांट्रेक्ट मे है .जोलौकिक है वह प्यार करता है ,स्नेह करता है सम्मान करता है .किसी को दुख नही देना चाहता ,अपने लिए नही दूसरोंके लिए जीना चाहता है .सहिष्णु होता है .उन्मुक्त होता है कपाट विहीन स्वच्छन्द होता है जिसकी जड़ें लोक मे नही किंतु आभिजात्य है वह इन सब के बिपरीत होता है .मा के हंत की बनी गुदड़ी लौकिक है .उस पर सुंदर कवर ,संस्कृति है ..फोम का गद्दा आभिजात्य है सभी है ..जो आत्मीयता प्रेम स्नेह आनंद संतोष गुदड़ी मे सोने मे है वह फोम के गद्दे मे नही .फोम आप को सुख देगा आनंद नही ..केवल आभिजात्य होना हमे दंभ देता है .अभिमान देता है .जड़ बनता है .संबेदना शून्य कर देता है .आज की दिनचर्या मे हम सभ्य हैं आभिजात्य हैं लेकिन लौकिक नही .इसी मे हम अपना पं खोते जा रहे हैं और मानसिक रूप से रुग्ण तथा गुलाम होते जा रहे हैं .हमे सोचना होगा की अपनी आने वाली पीढ़ी को उत्तरा धिकार मे हमे क्या देना है ..तोड़ा सा अपना पन या ढेर सारा आभिजात्य .,/हमारी जातीय संस्कृति विलुप्त हो गयी है ..इसके ज़िम्मेदार हम ही हैं ... कोई भी लकड़ी बिना स्नेह .आत्मीयता श्रम के गुड़िया नही बनती . हमे याद रखना चाहिए ..अभी भी समय है जो जहाँ है वहीं अपने जातीय गुनो को संरक्शाट कर सकता है .यह आप का धर्म भी है .कर्ज़ भी है ..रोटी से पिज़्ज़ा की ओर भागती पीढ़ी ........कल क्या होगी सोचिए ज़रा  

Saturday, 1 December 2012

रास्तों को बदल लेना फितरत है ज़माने की ..
मील के पत्थर ये शौक पाला नहीं करते ..

गाँव के दो चित्र


गाँव के दो चित्र
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प्रात के फैले गुलाबी धुप के संग
चहचहाते बुलबुलों के कई जोड़े
पूर्व की बंसवारियों के झुरमुटों में
मुक्त चंचल फुदकते निर्द्वन्द
देखती थी रोज ललचाई सुरेखा
फाड़ कर दींदे बड़ी उत्फुल्लता से
बज रही होतीं हैं मंगल घंटियाँ
पास के ही मंदिरों के गर्भ की
दौड़ने लगता है सारा गाँव
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एक कोने बिछी गुदड़ी में समाये
एक दूजी बांह का तकिया लगाये
सो रहा है एक दम्पति
झोपडी से जहर रही होती सफेदी चांदनी की
दमकता है रूप जीवन संगिनी का
झांकता है फटे वस्त्रों से अभावों में बिलम्बित क्षुब्ध यौवन
फिर समर्पण स्नेह का इतिहास लिखता
स्वप्न में खोया समूचा गाँव